Best Collection Of Short Love Stories In Hindi Font

वो चिट्ठियां जिनके पते नहीं…

कुछ चिट्ठियां कभी सही पते पर नहीं पहुंच पातीं। वो भटकने के लिए अभिशप्त होती हैं। मुमकिन है कि देर-सवेर कभी सही चौखट मयस्सर हो भी जाती हो मगर चिट्ठी का संबंध प्रासंगिकता से होता है। अगर लेट हो गई तो फिर उसकी कीमत घट जाती है…कई बार तो खत्म हो जाती है। पिछले दिनों एक ऐसी ही चिट्ठी मिली। मंजिल से दूर और वक्त से छिटकी हुई। मैं नहीं जानता कि वो मुझे जहां मिली वहां तक पहुंची कैसे। जुबान होती तो शायद बोलकर बताती। अब तो उसे उलट-पुलटकर बस अंदाजा लगा सकते हैं सो मेरे साथी और मैं लगाते रहते हैं। मेरा दिल है कि आपको उसके बारे में बताऊं।
पिछले शनिवार की बात है। मुंबई में घूमते-घामते एक पुरानी किताबों की दुकान पर पहुंचे। ना जाने कहां-कहां से पुरानी किताबें वहां शरण पाती हैं और फिर एकाध दिन सुस्ताने के बाद किसी ना किसी के हाथ बिक जाती हैं। हमारे हाथ भी एक किताब लगी। किताब के कवर पेज पर अभिषेक बच्चन थे। जाहिर है कि किताब फिल्मों पर आधारित थी। विषयवस्तु जानने की इच्छा में किताब को उलटा-पलटा। इसी देखादेखी में पाया कि एक गुलाबी लिफाफा दो पन्नों के बीच चिपका है। प्यार-सा छोटा लिफाफा बंद नहीं था। एक चिट्ठी उसमें से बाहर झांक रही थी।
blog_14547यही है वो किताब जिसमें सौमित्रा की चिट्ठी मिली।
9 साल पहले बंगाल के मालदा से लिखी गई वो चिट्ठी एक रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी की बेटी सौमित्रा ने लिखी थी। चिट्ठी लिखने के तरीके से मालूम पड़ता है कि साढ़े 17 साल की सौमित्रा जवान होती सपनों से भरपूर जिंदादिल लड़की है। टूटी फूटी अंग्रेजी में सौमित्रा ने 25 मार्च 2006 को वो पाती अभिषेक बच्चन को लिखी है। हम सबको याद है उस दौर में अभिषेक दर्शकों की तरफ से अस्वीकार्य किए जाने के बाद सफल कम बैक कर रहे थे। उनकी ‘युवा’, ‘बंटी और बबली’ और ‘सरकार’ आ चुकी थी जबकि ‘कभी अलविदा ना कहना’ का इंतज़ार था। सौमित्रा अभिषेक को बेहद प्यार करने का दावा करने के साथ शादी करने की जल्दी में है। इसके पीछे एक वजह वो जतिंद्र बनर्जी भी है जिसे सौमित्रा के पिता उसके लिए पसंद कर चुके हैं।
जतिंद्र भारी मूंछे रखने वाला दूधिया है। सौमित्रा को लगता है कि वो उसे रेपिस्ट की तरह घूरता है। उसे अभिषेक की ’ब्लफमास्टर’ सबसे ज्यादा पसंद है जिसे उसने चिट्ठी लिखने तक 35 बार देखा है और गोल्डन जुबली का वादा है। सौमित्रा को ‘वन लव’ गाना बहुत पसंद आया मगर वो ये नहीं समझ पा रही कि मुंबई की ‘बेशर्म’ और ‘संस्कारहीन’ लड़कियां अभिषेक के पीछे क्यों पड़ी रहती हैं। ऊपर से वो इतने छोटे कपड़े पहनती हैं कि सौमित्रा को उन्हें टीवी पर देखकर भी शर्म आती है। सौमित्रा अभिषेक को रानी मुखर्जी और ‘ओशोजा’ रॉय से शादी ना करने के लिए भी मना रही है। उसका मानना है कि रानी बंगाली होने के नाते कुछ ठीक तो है मगर वो खुद उससे काफी बेहतर है। खत के आखिर में वो अभिषेक को ये भी बताती है कि वो अपने दिल की बातें खून से लिखना चाहती थी मगर क्या करे.. उसे सुई से डर लगता है।

लिफाफे पर पता था- Abisek Bochchon, Film Star, Jalsa Juhu Mumbai । एक कोने में तीर से दिल छिदा था और आई लव यू भी लिखा था।
मैं जहां खड़ा होकर उस चिट्ठी को पढ़ रहा था ‘जलसा’ वहां से तकरीबन 8 किलोमीटर दूर है। ये भी जानता था कि दरअसल वो दूरी 8 किलोमीटर से बहुत ज़्यादा है। ना होती तो वो चिट्ठी 9 साल तक ना भटकती रहती। फिर याद आया 90 के दशक में दूरदर्शन पर आया एक धारावाहिक जिसमें एक डाकिया कुछ चिट्ठियां पते पर पहुंचाए बिना मर जाता है। उसका बेटा 20 साल बाद उन सभी चिट्ठियों को उनके सही पतों तक पहुंचाता है लेकिन तब तक वक्त बहुत आगे निकल चुका होता है। हर चिट्ठी के पहुंचने के बाद एक अलग ही कहानी उपजती है। इसी तरह सौमित्रा की चिट्ठी को मालदा से चले 9 साल बीत गए हैं। नहीं मालूम कि उस उत्सुक सी लड़की का क्या हुआ। मन है कि मालूम करूं। मूंछों वाले जतिंद्र से वो बच भी सकी या फिर अब वही उसका ‘अभिषेक बच्चन’ है।
(पहचान छिपाने के लिए चिट्ठी के पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं)