Best Collection Of Short Love Stories In Hindi Font

प्रेम v.३.५
खाना खा लेने के बाद बिल आ चुका था… उसने हाथ पर्स निकालने के लिए बढ़ाया. वो समझ गई और झट से बिल चुकाने की फरमाइश की. “अरे नहीं, मैं दे रहा हूं”- शायद खाने का न्यौता खुद देने की वजह से उसने अपने को मेज़बान माना था या फिर मुमकिन है कि एक लड़का होने के नाते बिल चुकाने का अहसास उसके मध्यमवर्गीय संस्कारों की देन था. जो भी हो वो नहीं माना. गुलाब जानती थी कि अभी एक रास्ता और है. उसने पेशकश की- ” तो चलो आधा-आधा चुकाते हैं. मैं और मेरे दोस्त ऐसा ही करते हैं”
“करते होंगे.. मैं नहीं करता. या तो पूरा चुकाओ या फिर कुछ भी नहीं”- लापरवाही से उसने जवाब दिया…
मालूम नहीं किसने बिल दिया लेकिन उसके बाद कई बार वो खाने पर साथ गए.. जिसने भी पैसे दिए पूरे ही दिए, आधे-आधे नहीं. दोस्ती से कुछ ज़्यादा रिश्ते पर ये अपनी ही तरह की मुहर थी….….