Best Collection Of Short Love Stories In Hindi Font

तुम गली से निकलती और मैं पीछे से आता. कुछ दूर चलने के बाद तुम्हें बाइक पर बैठाकर हम रफ्तार पकड़ लेते. तब वो बाइक घोड़े से कम नहीं लगती थी. मैं पृथ्वीराज जैसे अहसास के साथ तुम्हें अपनी संयोगिता मानकर बाइक को रेस देता चलता. लगता था मानो जमाने को पीछे छोड़ दिया और अब कभी लौटना नहीं होगा. ज़रा शहर की जद से बाहर निकले तो खुद ही तुम्हारी बाहें पकड़कर अपनी कमर तक ले आता. तुम सकुचाती थी पर मैं मानता कहां था. हालांकि घर वापस लौटते हुए हम उतने ही उदास होते थे. उदासी जितनी गहराती थी तुम्हारी बाहों की कसावट उतनी ही बढ़ती जाती थी.
(कुछ कहानी कुछ किस्से)