Best Collection Of Short Love Stories In Hindi Font

अगले ही पल मैं दरगाह के दर पे खड़ा था, जहां अपनी-अपनी मन्नतों में एक-दूसरे को बांध आए थे हम.. अब वहाँ से तुम्हें आज़ाद भी तो करना था न… मन्नत के रंगीन धागे को खोलते वक़्त पिछला सारा मंज़र निगाहों के सामने घूम रहा था… वो मंदिर भी जहां साल शुरू होने की दूसरी तारीख़ को साथ गए थे दोनों और जब मत्था टेका था तो अनजाने में ही पंडित ने दोनों को साथ ही सुखी रहने का आशीर्वाद दे दिया था….. ख़ैर, मैंने एक लंबी सांस भरी और धागा खोल तुम्हें आज़ाद किया.. हाँ, मगर ख़ुद को बंधा ही छोड़ दिया उस धागे में जिसे तुमने मेरे नाम से बांधा था.. उसे भी खोलूँगा तब, जब अपने आख़िरी वक़्त में तुमसे आख़िरी दफ़ा मिलने आऊंगा……